
परिचय
Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act : भारत का गांव सिर्फ मिट्टी और खेतों का नाम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों सपनों, मेहनत और आत्मसम्मान की कहानी है। लेकिन लंबे समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी ने लोगों को मजबूरी में शहरों की ओर पलायन करने पर मजबूर किया। इसी दर्द को समझते हुए भारत सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया, जिसने काम को अधिकार बनाया और गरीबी से लड़ने को ताकत दी। इस कानून का नाम है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जिसे आम तौर पर मनरेगा या MGNREGA कहा जाता है।
यह योजना केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन को स्थिरता, सम्मान और आत्मनिर्भरता देने का मजबूत माध्यम बन चुकी है।
Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act क्या है
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम भारत सरकार द्वारा लागू किया गया एक ऐतिहासिक कानून है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देना है। इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों का मजदूरी आधारित रोजगार देने का प्रावधान है। यह रोजगार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि लोगों को अपने गांव छोड़कर दूर न जाना पड़े।
यह योजना वर्ष 2005 में लागू की गई थी और धीरे धीरे यह देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक बन गई। इसका नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया, क्योंकि यह योजना उनके आत्मनिर्भर भारत और श्रम के सम्मान के विचार को साकार करती है।
MGNREGA का उद्देश्य और भावना
MGNREGA का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगारी को कम करना और गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह योजना लोगों को सिर्फ पैसा नहीं देती, बल्कि उन्हें काम के बदले सम्मान देती है। गांवों में जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, भूमि सुधार जैसे कार्यों के माध्यम से न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि गांव की बुनियादी संरचना भी मजबूत होती है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित होते हैं।
MGNREGA के तहत मिलने वाला रोजगार और मजदूरी
MGNREGA के अंतर्गत दिया जाने वाला रोजगार पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से जुड़ा होता है। काम की मांग करने पर निश्चित समय सीमा में रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी होती है। मजदूरी सीधे श्रमिक के बैंक खाते में जमा की जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और श्रमिक को उसका पूरा हक मिलता है।
नीचे दी गई तालिका से MGNREGA के मुख्य प्रावधानों को सरल रूप में समझा जा सकता है।
| विषय | विवरण |
| रोजगार की गारंटी | प्रति परिवार प्रति वर्ष सौ दिन |
| कार्य का स्वरूप | अकुशल मजदूरी आधारित कार्य |
| भुगतान प्रक्रिया | सीधे बैंक खाते में |
| कार्य स्थल | श्रमिक के गांव या आसपास |
| योजना का क्षेत्र | ग्रामीण भारत |
ग्रामीण विकास में MGNREGA की भूमिका
MGNREGA ने गांवों की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। जहां पहले सूखे तालाब और कच्ची पगडंडियां थीं, वहां आज पानी के स्रोत, मजबूत रास्ते और उपजाऊ जमीन देखने को मिलती है। महिलाओं की भागीदारी ने इस योजना को और भी मजबूत बनाया है, क्योंकि उन्हें घर के पास रोजगार मिला और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।
इसके साथ ही इस योजना ने ग्रामीण पलायन को काफी हद तक कम किया है। जब गांव में ही काम और आमदनी का साधन मिलता है, तो लोग अपने परिवार और समाज के साथ रहकर बेहतर जीवन जी पाते हैं।
MGNREGA और सामाजिक सशक्तिकरण
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम केवल आर्थिक योजना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का माध्यम भी है। इसने गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का अवसर दिया है। काम मांगने का अधिकार होने से लोगों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं।
योजना के अंतर्गत रोजगार और मजदूरी व्यवस्था
MGNREGA के अंतर्गत दिया जाने वाला कार्य अकुशल श्रम पर आधारित होता है, जैसे पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य। मजदूरी सीधे लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में जमा की जाती है, जिससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। आमतौर पर मजदूरी एक सप्ताह के भीतर दी जाती है और किसी भी स्थिति में पंद्रह दिनों से अधिक की देरी नहीं होती। इस योजना की एक बड़ी विशेषता यह है कि पुरुष और महिला श्रमिकों को समान मजदूरी दी जाती है, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलता है। MGNREGA पूरे देश में लागू है, केवल उन जिलों को छोड़कर जहां जनसंख्या पूरी तरह शहरी है।
MGNREGA से मिलने वाले लाभ और सुविधाएं
इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले व्यक्ति को पंद्रह दिनों के भीतर काम मिलने की गारंटी होती है। प्रयास किया जाता है कि कार्य स्थल आवेदक के निवास स्थान से पांच किलोमीटर की दूरी के भीतर हो। यदि कार्य स्थल इससे अधिक दूरी पर होता है, तो श्रमिक को न्यूनतम मजदूरी का अतिरिक्त भत्ता यात्रा और भोजन के लिए दिया जाता है। कार्य स्थलों पर छाया, पीने का पानी और प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे श्रमिक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में काम कर सके।
दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और विस्थापित परिवारों के लिए विशेष प्रावधान
MGNREGA योजना समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की भावना पर आधारित है। दिव्यांग व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनके अनुकूल कार्यों की पहचान की जाती है और कार्य स्थलों पर आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था की जाती है। बड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों में उनके लिए विशेष कार्य चिन्हित किए जाते हैं और उन्हें पानी व्यवस्था, शिशु देखभाल जैसी जिम्मेदारियों में प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे परिवारों को विशेष रंग का जॉब कार्ड भी प्रदान किया जाता है ताकि उनकी पहचान और सुविधा बनी रहे।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कम शारीरिक श्रम वाले कार्यों की पहचान की जाती है और उनके अलग समूह बनाए जा सकते हैं। वहीं आंतरिक रूप से विस्थापित परिवारों को अस्थायी जॉब कार्ड दिया जाता है, जो उनके मूल स्थान पर लौटने तक मान्य रहता है।
पात्रता की शर्तें
MGNREGA योजना का लाभ वही व्यक्ति उठा सकता है जो अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु का हो और ग्रामीण क्षेत्र में निवास करता हो। इस योजना में किसी प्रकार की आय सीमा या वर्ग आधारित प्रतिबंध नहीं है, जिससे हर जरूरतमंद परिवार को समान अवसर मिलता है।
MGNREGA के लिए आवेदन प्रक्रिया
MGNREGA के लिए आवेदन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला कोई भी वयस्क सदस्य सादे कागज पर आवेदन लिखकर ग्राम पंचायत कार्यालय में जमा कर सकता है। चाहें तो पंचायत सचिव या ग्राम रोजगार सहायक के सामने मौखिक रूप से भी पंजीकरण का अनुरोध किया जा सकता है। आवेदन में परिवार के उन वयस्क सदस्यों के नाम दर्ज किए जाते हैं जो अकुशल श्रम करने के इच्छुक हों।
पंचायत द्वारा आवेदन की जांच की जाती है, जिसमें परिवार की वास्तविक स्थिति, स्थानीय निवास और आयु संबंधी जानकारी का सत्यापन होता है। सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र परिवार का विवरण सरकारी प्रणाली में दर्ज किया जाता है और पंद्रह दिनों के भीतर जॉब कार्ड जारी किया जाता है। यह जॉब कार्ड ग्राम पंचायत के अन्य निवासियों की उपस्थिति में परिवार के किसी एक सदस्य को सौंपा जाता है। पंजीकरण पूरे वर्ष ग्राम पंचायत कार्यालय में खुला रहता है।
MGNREGA के लिए आवश्यक दस्तावेज
MGNREGA में पंजीकरण के समय कुछ बुनियादी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिन्हें नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है।
| दस्तावेज | विवरण |
| पहचान प्रमाण | आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड या पैन कार्ड |
| फोटो | आवेदक का पासपोर्ट साइज फोटो |
| परिवार विवरण | परिवार के सभी वयस्क सदस्यों का नाम, आयु और लिंग |
| पता विवरण | गांव, ग्राम पंचायत और ब्लॉक का नाम |
| बैंक विवरण | बैंक या डाकघर खाते की जानकारी |
| हस्ताक्षर | हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान |
निष्कर्ष
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण भारत की रीढ़ बन चुका है। यह योजना रोजगार, सम्मान और विकास को एक साथ जोड़ती है। जब किसी गरीब परिवार को यह भरोसा होता है कि जरूरत पड़ने पर उसे काम मिलेगा, तो उसका भविष्य सुरक्षित महसूस होता है। MGNREGA ने यह साबित किया है कि अगर नीतियां सही सोच और ईमानदारी से लागू हों, तो वे लाखों जिंदगियों में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। MGNREGA से संबंधित नियम, मजदूरी दर और प्रावधान समय समय पर बदल सकते हैं। सटीक और नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित राज्य सरकार या भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट और अधिसूचनाओं को अवश्य देखें।