1. CGTMSE क्या है
CGTMSE का पूरा नाम क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) है। यह योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को बिना किसी गारंटी या संपत्ति गिरवी रखे ऋण उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत नए और पहले से चल रहे दोनों प्रकार के एमएसएमई व्यवसायों को बैंक से ऋण लेने में सहायता मिलती है।
इस योजना को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के सहयोग से चलाया जाता है। इसके लिए एक ट्रस्ट बनाया गया है जिसे क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज कहा जाता है। यदि कोई एमएसएमई इस योजना के अंतर्गत पात्र होता है, तो उसे बैंक से बिना किसी जमानत के ऋण मिल सकता है।
2. CGTMSE योजना के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाएँ
CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) योजना के अंतर्गत व्यवसाय को कई प्रकार की वित्तीय सुविधाएँ मिलती हैं। इस योजना में पांच करोड़ रुपये तक का बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। व्यवसाय की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्यशील पूंजी के रूप में कैश क्रेडिट की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा मशीनरी खरीदने, दुकान कार्यालय या अन्य व्यावसायिक संपत्ति लेने और व्यापार के विस्तार के लिए टर्म लोन की सुविधा भी मिलती है।
3. CGTMSE योजना की पात्रता
योजना का लाभ वे नए और मौजूदा माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज ले सकते हैं जो निर्माण गतिविधियों में लगे हुए हैं। सेवा क्षेत्र से जुड़े कई व्यवसाय भी इसके लिए पात्र होते हैं, लेकिन कुछ श्रेणियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत खुदरा व्यापार, शैक्षणिक संस्थान, स्वयं सहायता समूह, प्रशिक्षण संस्थान और कुछ चयनित एनबीएफसी पात्र नहीं होते।
4. CGTMSE योजना में गारंटी कवरेज
CGTMSE फंड विभिन्न श्रेणियों में ऋण पर गारंटी कवरेज प्रदान करता है। महिला उद्यमियों द्वारा संचालित सूक्ष्म और लघु उद्योगों को अधिक कवरेज मिलता है। उत्तर पूर्वी राज्यों और सिक्किम में दिए गए ऋणों पर भी अधिक सुरक्षा दी जाती है।
यदि किसी कारणवश ऋण चुकाने में चूक होती है, तो ट्रस्ट पचहत्तर प्रतिशत या अस्सी प्रतिशत तक की राशि बैंक को चुकाता है, जिसकी अधिकतम सीमा पचास लाख रुपये होती है। पचास लाख से दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर गारंटी कवरेज पचास प्रतिशत तक सीमित रहता है।
5. CGTMSE योजना के शुल्क
CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) योजना के अंतर्गत ट्रस्ट द्वारा ऋण राशि पर वार्षिक गारंटी शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क स्वीकृत ऋण राशि का एक निश्चित प्रतिशत होता है।
| ऋण राशि | वार्षिक गारंटी शुल्क |
|---|---|
| दस लाख रुपये तक | 0.37 प्रतिशत |
| दस लाख से पचास लाख रुपये तक | 0.55 प्रतिशत |
| पचास लाख से एक करोड़ रुपये तक | 0.60 प्रतिशत |
| एक करोड़ से दो करोड़ रुपये तक | 1.20 प्रतिशत |
| दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक | 1.35 प्रतिशत |
6. विशेष श्रेणियों को मिलने वाली रियायत
कुछ विशेष वर्गों को CGTMSE योजना में अतिरिक्त छूट दी जाती है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग व्यक्तियों और अग्निवीरों को शुल्क में छूट मिलती है। उत्तर पूर्वी राज्यों, जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों तथा आकांक्षी जिलों में स्थित इकाइयों को भी रियायत दी जाती है। इसके अलावा जेड ई डी प्रमाणित एमएसएमई को भी शुल्क में छूट का लाभ मिलता है। इन सभी श्रेणियों को गारंटी शुल्क में दस प्रतिशत तक की छूट दी जाती है।
7. CGTMSE प्रमाणपत्र कैसे प्राप्त करें
यदि कोई उद्यमी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से एमएसएमई ऋण के लिए आवेदन करता है और CGTMSE योजना के अंतर्गत पात्र पाया जाता है, तो आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद CGTMSE प्रमाणपत्र और डिजिटल स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है। इस प्रमाणपत्र और पत्र को संबंधित बैंक में जमा करके ऋण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
8. CGTMSE योजना के प्रमुख लाभ
CGTMSE योजना के अंतर्गत गारंटी कवरेज की सीमा को दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है। गारंटी शुल्क को कम किया गया है जिससे एमएसएमई पर ऋण का बोझ कम होता है। माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को भी सदस्य ऋणदाता के रूप में शामिल किया गया है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को अतिरिक्त लाभ और कवरेज दिया गया है। महिलाओं, जेड ई डी प्रमाणित इकाइयों और आकांक्षी जिलों में स्थित उद्योगों को गारंटी शुल्क में दस प्रतिशत की छूट और पचासी प्रतिशत तक कवरेज मिलता है। न्यूनतम वार्षिक गारंटी शुल्क को घटाकर 0.37 प्रतिशत कर दिया गया है।
9. भारतीय अर्थव्यवस्था में CGTMSE का योगदान
योजना भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एमएसएमई क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग दस प्रतिशत का योगदान देता है और सात करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यह योजना नए और पुराने दोनों प्रकार के एमएसएमई के लिए बेहद लाभकारी है, खासकर उन उद्यमियों के लिए जिनके पास व्यवसाय शुरू करने का अधिक अनुभव नहीं होता।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऋण पर सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिससे उद्यमी और बैंक दोनों को विश्वास मिलता है। यह योजना वैकल्पिक होते हुए भी सरकार द्वारा गंभीरता से निगरानी में रखी जाती है और लंबे समय तक इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है।
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। योजना से संबंधित नियम, शुल्क और पात्रता समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्णय लेने से पहले संबंधित बैंक या आधिकारिक स्रोत से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।